ब्रेकिंग
पुलिस कमिश्नर डॉ संजीव शुक्ला ने अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिस जवानों का जाना हाल Raipur Central Jail Bail: जेल से बाहर आते ही अमित बघेल ने भरी हुंकार, 2028 चुनाव पर किया बड़ा ऐलान स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का जिला अस्पताल से कलेक्ट्रेट तक मार्च, मांगों को लेकर सरकार के नाम सौंपा ज्ञ... साड़ी की जिद बनी मौत की वजह! पत्नी ने पति को उतारा मौत के घाट CM साय से लघु उद्योग भारती की मुलाकात, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर की तैयारियों पर हुई अहम चर्चा Sai Cabinet Meeting Today: आज साय सरकार ले सकती है बड़े फैसले, किसानों के लिए हो सकता है बड़ा ऐलान लोक कर्म विभाग की समीक्षा बैठक में विकास कार्यों की प्रगति पर सख्त नजर, समय-सीमा में कार्य पूर्ण करन... भव्य सावन मेले की तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार, सांस्कृतिक समिति की बैठक में बनी कार्ययोजना, छत्तीसगढ़ में मेहरबान हुआ मानसून, रायपुर समेत कई जिलों में बारिश; मौसम विभाग का ऑरेंज-येलो अलर्ट दुर्ग में अंधे कत्ल का खुलासा: महिला की हत्या के मामले में 2 आरोपी गिरफ्तार, दुष्कर्म की कोशिश नाकाम...
दुर्ग

स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने पकड़ी आत्मनिर्भर बनने की नई राह

दुर्ग |  शासन द्वारा संचालित दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के माध्यम से नगर पालिक निगम भिलाई चरौदा के वार्ड नंबर 40 गनियारी पटेल पारा की महिलाओं ने जय माँ शाकाम्भरी स्व

सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की राह पकड़ ली। समूह में पन्द्रह महिला सदस्य है।

महिला समूह के सदस्यों ने शुरूआत से ही स्वंय की सहायता हेतु बचत कर अपने समूह को सशक्त बनाने का प्रण लिया था। महिलाएं अपनी मेहनत और लगन से आत्मनिर्भर बन चुकी है।

प्रारंभ में महिलाओं ने प्रति सदस्य 100 रूपए के आधार पर 1500 रूपए हर महीने बैंक में जमा करना प्रारंभ किया, जिसके उपरांत समूह को केन्द्र शासन की महत्वपूर्ण योजना दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन अंतर्गत 10 हजार रूपए आवर्ति निधि प्रदान की गई।

समूह की महिलाओं ने संकलित जमा राशि से और बैंक लिंकेज के माध्यम से एच.डी.एफ.सी. बैंक भिलाई-3 से 50 हजार रूपए ऋण प्राप्त करके 40 डिसमिल जमीन में सब्जी उत्पादन का कार्य प्रारंभ किये।

समूह की महिलाएं उत्पादित सब्जी को गांव के सप्ताहिकी और आस-पास के बाजारों में बेचकर 15 से 18 हजार रूपए तक की आदमनी अर्जित करने लगे हैं।

सब्जी की खेती से समूह की महिलाओं को रोजगार मिला है। साथ ही बैंक ऋण चुकाते हुए उनकी इस उपलब्धि से समूह आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Slot Site
Back to top button